भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में जबरदस्त उछाल, 575 अरब डॉलर के पार पहुंचा

विदेशी मुद्रा भंडार (प्रतीकात्मक तस्वीर)

देश का विदेशी मुद्रा भंडार (Foreign Exchange Reserves/Forex Reserves) 20 नवंबर को खत्म हुए हफ्ते में 2.518 अरब डॉलर बढ़ . अधिक पढ़ें

  • भाषा
  • Last Updated : November 27, 2020, 22:43 IST

मुंबई. देश का विदेशी मुद्रा भंडार (Foreign Exchange Reserves/Forex Reserves) 20 नवंबर को खत्म हुए हफ्ते में 2.518 अरब डॉलर बढ़कर 575.29 अरब डालर के रिकॉर्ड उच्च स्तर पर पहुंच गया. भारतीय रिजर्व बैंक (Reserve Bank of India) ने शुक्रवार को इसके आंकड़े जारी किए. इससे पिछले 13 नवंबर को समाप्त सप्ताह में देश का विदेशी मुद्रा भंडार 4.277 अरब डॉलर की भारी वृद्धि के साथ 572.771 अरब डॉलर हो गया था.

एफसीए बढ़कर 533.103 अरब डॉलर हुई
समीक्षाधीन अवधि में विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ने की बड़ी वजह विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों (Foreign Currency Assets) का बढ़ना है. ये परिसंपत्तियां कुल विदेशी मुद्रा भंडार का अहम हिस्सा होती है. रिजर्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार समीक्षावधि में एफसीए 2.835 अरब डॉलर बढ़कर 533.103 अरब डॉलर हो गईं. एफसीए को दर्शाया डॉलर में जाता है, लेकिन इसमें यूरो, पौंड और येन जैसी अन्य विदेशी मुद्राएं भी शामिल सबसे लाभदायक विदेशी मुद्रा रणनीति क्या है होती है.

देश के स्वर्ण भंडार में गिरावट
समीक्षाधीन सप्ताह के दौरान देश का स्वर्ण भंडार (Gold Reserves) का मूल्य 33.9 करोड़ डॉलर घटकर 36.015 अरब डॉलर रहा. देश को अंतरराष्ट्रीय मु्द्रा कोष (International Monetary Fund) में मिला विशेष आहरण अधिकार 40 लाख डॉलर की मामूली वृद्धि के साथ 1.492 अरब डॉलर और आईएमएफ के पास जमा मुद्रा भंडार 1.9 करोड़ डॉलर बढ़कर 4.680 अरब डॉलर रहा.

Q2FY21 GDP: जुलाई-सितंबर में जीडीपी 7.5 फीसदी गिरी
वहीं, केंद्र सरकार ने मौजूदा वित्त वर्ष 2020-21 (FY 2020-21) की दूसरी तिमाही यानी जुलाई-सितंबर तिमाही के आंकड़े जारी कर दिए हैं. दूसरी तिमाही में देश की जीडीपी (GDP) -7.5 फीसदी रही है. हालांकि ये आंकडे अप्रैल-मई-जून तिमाही के मुकाबले काफी बेहतर हैं. लेकिन लगातार दो तिमाही में निगेटिव ग्रोथ को तकनीकी तौर पर मंदी माना जाता है. शुक्रवार शाम सरकार ने जीडीपी के आंकड़े जारी किए.

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भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में हुई उल्लेखनीय वृद्धि, बाहरी ऋण से भी निकला आगे

भारत का विदेशी मुद्रा भंडार

भारतीय अर्थव्यवस्था बहुआयामी विकास की ओर बढ़ रही है। सरकार का अनुमान है कि इस वित्तीय वर्ष में भारतीय अर्थव्यवस्था 8 फीसदी या 8.5 फीसदी की आर्थिक वृद्धि दर से आगे बढ़ेगी। इन सब के बीच एक महत्वपूर्ण उपलब्धि यह है कि भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 634 बिलियन डॉलर हो गया है। ध्यान देने वाली बात है कि भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 13.2 महीने के कुल भारतीय निर्यात से अधिक है और देश पर वर्तमान समय में जितना बाहरी कर्ज है, वह भी विदेशी मुद्रा भंडार के सापेक्ष में कम हो गया है। भारत के उच्च विदेशी मुद्रा भंडार में और भी वृद्धि होने की संभावना है, क्योंकि भारत की ओर विदेशी निवेशक लगातार आकर्षित हो रहे हैं और साथ ही भारतीय निर्यात बढ़ रहा है, जिस कारण लाभ भी तेजी से देखने को मिल रहा है।

वित्तीय वर्ष 2021-22 में भारत का भुगतान संतुलन सकारात्मक रहा, जिस कारण रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के लिए विदेशी मुद्रा का संचय करना आसान था। वही विदेशी निवेश की बात करें, तो भारतीय स्टार्टअप कंपनियों ने ही 36 बिलियन डॉलर का निवेश आकर्षित किया है। इस वर्ष निर्यात की बात करें, तो भारत का निर्यात 400 अरब डॉलर के लक्ष्य को प्राप्त करने वाला है। ऐसे में विदेशी मुद्रा भंडार का बढ़ना सबसे लाभदायक विदेशी मुद्रा रणनीति क्या है स्वाभाविक है। इस समय केवल तीन देश, चीन, जापान और स्विट्जरलैंड ही विदेशी मुद्रा भंडार के मामले में भारत से आगे हैं।

मौजूदा समय में वैश्विक अर्थव्यवस्था मुद्रा स्फीति से जूझ रही है। कोरोना के दौरान सभी देशों ने आर्थिक पैकेज जारी किए, लोगों को बड़ी मात्रा में धन सीधे उनके बैैंक खातों में भेजा। इसके अतिरिक्त कई अन्य योजनाओं के माध्यम से बाजार में मुद्रा की तरलता बढ़ाई गई, जबकि इस काल में उत्पादन बंद रहा। अब वैश्विक स्तर पर एक ऐसी स्थिति है कि लोगों के पास मुद्रा संचय है, लेकिन उत्पादन अभी भी उस स्तर तक नहीं पहुंचा है। ऐसे में मुद्रा स्फीति की स्थिति है, जिसे नियंत्रित करने के लिए अब मौद्रिक नीति में बदलाव होंगे।

सरकार की PLI योजना कर रही है कमाल

विदेशी मुद्रा के संचय का यह लाभ है कि जब दूसरे देश मुद्रा की तरलता कम करेंगे, भारत तब भी अपने संचयित मुद्रा कोष का प्रयोग कर सकेगा। भारत के विदेशी मुद्रा भंडार की वृद्धि में निवेश और निजी उद्यमों की सबसे बड़ी भूमिका रही है। ऐसे में सरकार की योजना निजी उद्यमियों को बढ़ावा देने की होनी चाहिए और सरकार यह कर भी रही है। PLI योजना भारत के औद्योगिकीकरण को सर्वांगीण विकास का अवसर दे रही है। PLI के कारण भारत कई नए सेक्टर, जैसे- सेमी कंडक्टर, ड्रोन, फूड प्रोसेसिंग आदि में मैन्युफैक्चरिंग हब बनने की ओर अग्रसर है। PLI के जरिये बड़े औद्योगिक इकाइयों का विस्तार होगा। वहीं, स्टार्टअप की बात करें तो इस समय भारत में स्टार्टअप के लिए अनुकूल वातावरण है और यह बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन का कारण बन रहा है। IT सेक्टर में लगातार नौकरियों का विस्तार इसी का परिणाम है।

इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर करने में लगी है मोदी सरकार

Michael Page India and Thailand के वरिष्ठ प्रबंध निदेशक और आर्थिक मामलों के जानकार निकोलस डमोलिन ने फाइनेंशियल एक्सप्रेस से बातचीत के दौरान बताया कि “वर्ष 2021 में कमर्चारियों की हायरिंग वर्ष 2020 की तुलना में काफी अलग रही है। बाजार में CXO स्तर की हायरिंग में 80-100% और मध्य-स्तर पर 40-50% की उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई।” उन्होंने यह भी बताया कि हेल्थकेयर, कंज्यूमर टेक, एडटेक, फिनटेक, आईटीईएस, मैन्युफैक्चरिंग, इंडस्ट्रियल आदि जैसे अन्य क्षेत्रों में भी हायरिंग में बड़ी बढ़ोत्तरी देखी गई है।

भारत में जिस हिसाब से निवेश हुए है, विशेषकर छोटी कंपनियों में, उसे देखकर यह निश्चित रूप से कहा जा सकता है कि इन क्षेत्रों में विस्तार इस वर्ष भी जारी रहेगा। सरकार स्वयं सीड फंड जैसी योजना के जरिए स्टार्टअप को फंड कर रही है। ध्यान देने वाली बात है कि केंद्र सरकार ने बड़ी कंपनियों को भी भारतीय स्टार्टअप में निवेश करने का सुझाव दिया है। सरकार गति शक्ति योजना के जरिए देश के इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर करने पर जोर शोर से काम कर रही है। बजट 2022-23 में सरकार ने इस ओर अपनी प्रतिबद्धता भी प्रदर्शित की है।

Rupee: गिरता रुपया भी है बड़े काम का, समझिए आपके लिए कैसे हो सकता है फायदेमंद

Rupee weakness: 2020 के शुरुआती दिनों में डॉलर की तुलना में एक्सचेंज रेट 71 रुपये के स्तर पर था. कोरोना आने के बाद यह 74-76 रुपये के स्तर तक गिर गया. रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण यह 78.50 रुपए के स्तर तक गिर गया. और अब 80 रुपए तक गिरने को मजबूर हो रहा है.

rupee

रुपये का मजबूत होना और गिरना दो देशों के बीच की बात है. कोई देश सिर्फ अपने स्तर पर न अपनी मुद्रा को मजबूत बना सकता है न कमजोर होने से बचा सकता है. दूसरे देशों का एक छोटा सा बदलाव भी आपकी मुद्रा को कमजोर या मजबूत बना सकता है. वैसे मोटे तौर पर कुछ चीजें ऐसी हैं जो मुद्रा की कमजोरी या मजबूती को प्रमुख रूप से प्रभावित करती हैं. ये हैं मुद्रास्फीति, व्याज दर में बदलाव, सार्वजनिक ऋण, मजबूत आर्थिक प्रदर्शन आदि.

रुपए में बदलाव कैसे आता सबसे लाभदायक विदेशी मुद्रा रणनीति क्या है है?
आपको हम बताते हैं रुपया कमजोर और मजबूत कैसे होता है. रोज सुबह जब बैंक खुलते हैं तो उनके पास बहुत सारे ग्राहक आते हैं. कुछ को विदेश यात्रा पर जाने के लिए डॉलर या कोई और मुद्रा चाहिए होती है तो कुछ को विदेश में पढ़ रहे अपने बच्चों की फीस भरने के लिए. इसी सबसे लाभदायक विदेशी मुद्रा रणनीति क्या है तरह किसी को विदेश में इलाज के लिए, निवेश के लिए या आयात के लिए. सरकारी कंपनियों को पेट्रोलियम, सोना, हथियार आदि खरीदने के लिए विदेशी मुद्रा की जरूरत होती है. उन लोगों को भी विदेशी मुद्रा की जरूरत होती है जिन्होंने शेयर बाजार में निवेश किया हुआ है और कुछ शेयर बेचकर पैसा अपने देश ले जाना चाहते हैं. सरकार या कंपनियों को विदेशों से लिए गए कर्ज को चुकाने के लिए भी विदेशी मुद्रा की जरूरत पड़ती है. अब सवाल ये है कि ये मुद्रा आएगी कहां से ?

विदेशी मुद्रा की आवक
कुछ मुद्रा विदेशों में काम कर रहे भारतीयों से आती है जो विदेशी मुद्रा कमाकर देश भेजते हैं. विदेशी मुद्रा विदेशी निवेशकों से भी आती है जो भारतीय बाजारों में निवेश करते हैं. कुछ मुद्रा निर्यात से आती है और कुछ मुद्रा विदेशों से लिए गए कर्ज के रूप में आती है. जो विदेशी टूरिस्ट भारत घूमने आते हैं और अपने रहने, खाने, खरीददारी पर खर्च करते हैं, उससे भी विदेशी मुद्रा आती है. जब तक सबसे लाभदायक विदेशी मुद्रा रणनीति क्या है इन दोनों यानी विदेशी मुद्रा के आने और विदेशी मुद्रा के बाहर जाने में सामंजस्य बना रहता है रुपया न कमजोर होता है न मजबूत. अगर कभी कभार थोड़ा इधर-उधर होता भी है तो रिजर्व बैंक बाजार में विदेशी मुद्रा खरीदकर या बेचकर स्थिति को संभाल लेता है. समस्या तब आती है जब यह संतुलन लंबे समय के लिए बिगड़ जाता है. जैसे कि अब हो रहा है.

आयात पर बढ़ा खर्च
पिछले कुछ समय से पेट्रोलियम के दाम लगातार बढ़ रहे हैं. भारत अपनी जरूरतों का 80 प्रतिशत पेट्रोलियम आयात करता है. इससे हमें ज्यादा विदेशी मुद्रा खर्च करनी पड़ रही है. आम तौर पर जब रुपया कमजोर होता है तो निर्यात बढ़ जाता है. लेकिन हम इस स्थिति का लाभ भी नहीं उठा पाए. हमारा निर्यात भी बढ़ने की बजाय कम हो गया. इस दौरान विदेशी निवेशकों ने भी भारतीय बाजारों से रुपया बड़े पैमाने पर निकाला. और जब यह संतुलन गड़बड़ाया तो रुपया कमजोर होने लगा. रूस-यूक्रेन युद्ध ने स्थिति को और बिगाड़ दिया है. जो सामान रूस और यूक्रेन से आयात होता था उनकी सप्लाई बाधित हुई है.

महंगाई पर असर
इससे वैश्विक स्तर पर महंगाई बढ़ गई है. फेडरल रिजर्व की तरफ से ब्याज दरें बढाए जाने के बाद अमेरिका में तेजी से ग्लोबल मनी पहुंचने लगी है. ऐसे में भारतीय मुद्रा का विदेशी भंडार भी तेजी से कम हुआ है. 2021 में सबसे लाभदायक विदेशी मुद्रा रणनीति क्या है भारत का विदेशी मुद्रा का भंडार 640 अरब डॉलर था जो अब घटकर 596 अरब डॉलर ही रह गया है.

रुपए पर राजनीति

मोदी जी ने रुपये के गिरने को जब भारत सरकार की साख और भ्रष्टाचार से जोड़ा था तो उस समय रुपया डॉलर के मुकाबले 65 रुपये था. लेकिन मोदी जी के सत्ता संभालने के सबसे लाभदायक विदेशी मुद्रा रणनीति क्या है बाद यह लगातार गिरता गया. जो लोग उम्मीद कर रहे थे मोदी जी की साख, ईमानदारी और सुशासन के कारण रुपया एक बार फिर से 40 रुपये प्रति डॉलर के स्तर पर जा सकता है, उन्हें झटका लगने लगा. रुपया नीचे जाने की बजाय ऊपर ही चढ़ता गया. 2020 के शुरुआती दिनों में डॉलर की तुलना में एक्सचेंज रेट 71 रुपये के स्तर पर था. कोरोना आने के बाद यह 74-76 रुपये के स्तर तक गिर गया. रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण यह 78.50 रुपए के स्तर तक गिर गया. और अब 80 रुपए तक गिरने को मजबूर हो रहा है.

इकनोमी से सीधा संबंध नहीं

हालांकि कुछ अर्थशास्त्रियों का मानना है कि रुपये के गिरने को देश की अर्थव्यवस्था के साथ जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए. वे ये भी मानते हैं कि रिजर्व बैंक को इसे रोकने के लिए डॉलर की खरीदारी जैसे कदम भी नहीं उठाने चाहिए क्योंकि आने वाले दिनों में कच्चे तेल के दाम काफी बढ़ सकते हैं. ऐसी स्थिति में भारत को विदेशी मुद्रा भंडार की जरूरत होगी. अगर रुपया गिरता है तो उसे गिरने देना चाहिए. यह चिंता का विषय नहीं होना चाहिए. कहीं ऐसा न हो कि रुपये को गिरने से बचाने की चक्कर में हमारी स्थिति भी पाकिस्तान और श्रीलंका जैसी हो जाए. इस समय श्रीलंका और पाकिस्तान के पास जरूरी सामानों के आयात के लिए भी विदेशी मुद्रा भंडार नहीं है.

रुपए की कमजोरी से कैसे निकलें?
ऐसे में विपक्ष के नेता राहुल गांधी की सम्यक प्रतिक्रिया और नसीहत बेहतर दिखती है. राहुल गांधी ने रुपये के कमजोर होने को लेकर मोदी जी की तरह सतही और ओछा कमेंट नहीं किया है. बल्कि इस स्थिति से निकलने का रास्ता भी सुझाया है. ठीक कोविड की तरह. राहुल गांधी ने ट्वीट करके कहा है कि मोदी जी जब रुपया गिरता था तो आप मनमोहन जी की आलोचना करते थे. अब रुपया अपने अब तक के सबसे कम मूल्य पर है. लेकिन मैं आंख मूंदकर आपकी आलोचना नहीं करूंगा. गिरता हुआ रुपया निर्यात के लिए अच्छा है. बशर्ते हम निर्यातकों को पूंजी के साथ समर्थन दें और रोजगार सृजित करने में मदद करें. हमारी अर्थव्यवस्था के प्रबंधन पर ध्यान दें न कि मीडिया की सुर्खियों पर.

मोदी जी आपदा को अवसर में बदलने में माहिर हैं. क्या वो रुपये की गिरती स्थिति का लाभ उठा पाने में सफल होंगे ?

अर्थ जगत की खबरें: विदेशी मुद्रा भंडार में भारी गिरावट और शाओमी सबसे लाभदायक विदेशी मुद्रा रणनीति क्या है ने अपने 900 कर्मचारियों को नौकरी से निकाला

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के आंकड़ों के अनुसार, 12 अगस्त को समाप्त सप्ताह के लिए विदेशी मुद्रा भंडार 2.24 अरब डॉलर गिरकर 5.70.74 अरब डॉलर हो गया है। चीनी स्मार्टफोन दिग्गज शाओमी ने मौजूदा आर्थिक मंदी के बीच 900 से अधिक नौकरियों की कटौती की है।

फोटोः IANS

नवजीवन डेस्क

गूगल ने दुनिया के अब तक के सबसे बड़े वेब डीडीओएस साइबर हमले को रोका

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गूगल ने एक ग्राहक पर अब तक के सबसे बड़े वेब डिस्ट्रीब्यूटेड डिनायल-ऑफ-सर्विस (डीडीओएस) साइबर हमले को रोक दिया है, जो प्रति सेकंड 46 मिलियन अनुरोधों (आरपीएस) पर पहुंच गया है। कंपनी के अनुसार, यह अब तक का सबसे बड़ा 'लेयर 7 डीडीओएस' है, जो पहले बताए गए रिकॉर्ड से कम से कम 76 प्रतिशत बड़ा है।

गूगल क्लाउड के तकनीकी प्रमुख सत्य कोंडुरु ने शुक्रवार देर रात एक बयान में कहा, "हमले के पैमाने का अंदाजा लगाने के लिए, यह विकिपीडिया (दुनिया की शीर्ष 10 तस्करी वाली वेबसाइटों में से एक) को केवल 10 सेकंड में सभी दैनिक अनुरोध प्राप्त करने जैसा है।"

डीडीओएस साइबर हमले आवृत्ति में बढ़ रहे हैं और आकार में तेजी से बढ़ रहे हैं।

एप्पल ने दूसरी तिमाही में भारत के स्मार्टवॉच बाजार में 197 फीसदी की वृद्धि दर्ज की

फोटोः IANS

अपनी वॉच सीरीज 7 की बिक्री पर सवार होकर, एप्पल ने जून तिमाही (दूसरी तिमाही) में भारत में स्मार्टवॉच बाजार में 197 प्रतिशत (साल-दर-साल) की वृद्धि दर्ज की। काउंटरपॉइंट रिसर्च की एक रिपोर्ट के अनुसार, द वॉच सीरीज 7 की बिक्री अच्छी बनी रही और देश में तिमाही के अंत तक लगभग 250,सबसे लाभदायक विदेशी मुद्रा रणनीति क्या है 000 शिपमेंट तक पहुंच गई।

रिपोर्ट में कहा गया है, "2022 की तीसरी तिमाही में आगामी लॉन्च के साथ, एप्पल को और बाजार हिस्सेदारी हासिल करने की उम्मीद है।"

2022 की पहली तिमाही में, एप्पल अपनी सीरीज के 7 वेरिएंट के साथ 104 प्रतिशत (साल-दर-साल) बढ़ा, जिसमें शिपमेंट का दो-तिहाई योगदान था। इसने इस साल के पहले तीन महीनों में भारत में 87 प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी के साथ प्रीमियम सेगमेंट (30,000 रुपये और उससे अधिक) का नेतृत्व किया।

वैश्विक मंदी के बीच शाओमी ने 900 से अधिक नौकरियों में कटौती की : रिपोर्ट

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चीनी स्मार्टफोन दिग्गज शाओमी ने मौजूदा आर्थिक मंदी के बीच 900 से अधिक नौकरियों की कटौती की है, क्योंकि जून तिमाही (दूसरी सबसे लाभदायक विदेशी मुद्रा रणनीति क्या है तिमाही) में इसके राजस्व में लगभग 20 प्रतिशत की गिरावट आई है। मीडिया रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है।

साउथ चाइना मॉर्निग पोस्ट के अनुसार, छंटनी ने शाओमी के कर्मचारियों की संख्या का लगभग 3 प्रतिशत प्रभावित किया। 30 जून, 2022 तक, कंपनी में 32,869 फुल टाइम कर्मचारी थे, जिनमें से 30,110 मुख्य भूमि चीन में स्थित थे, बाकी मुख्य रूप से भारत और इंडोनेशिया में स्थित थे। उसी समय-सीमा में कंपनी के अनुसंधान और विकास कार्यक्षेत्र में 14,700 कर्मचारी थे।

विदेशी मुद्रा भंडार 2.24 अरब डॉलर गिरकर 570.74 अरब डॉलर हुआ

फोटोः IANS

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के आंकड़ों के अनुसार, 12 अगस्त को समाप्त सप्ताह के लिए विदेशी मुद्रा भंडार 2.24 अरब डॉलर गिरकर 5.70.74 अरब डॉलर हो गया है।

समीक्षाधीन सप्ताह में, विदेशी मुद्रा संपत्ति (एफसीए) में गिरावट के कारण भंडार में गिरावट आई। यह 2.7 अरब डॉलर घटकर 506.994 अरब डॉलर रह गया है। स्पेशल ड्रॉयिंग राइट्स (एसडीआर) 102 मिलियन डॉलर बढ़कर 18.133 बिलियन डॉलर हो गया। आंकड़ों के अनुसार, आईएमएफ के साथ देश की आरक्षित स्थिति भी समीक्षाधीन सप्ताह में 70 लाख डॉलर बढ़कर 4.994 अरब डॉलर हो गई।

अदाणी पावर 7,000 करोड़ रुपये में डीबी पावर का करेगी अधिग्रहण

अर्थ जगत की खबरें: विदेशी मुद्रा भंडार में भारी गिरावट और शाओमी ने अपने 900 कर्मचारियों को नौकरी से निकाला

गौतम अदाणी की अगुवाई वाली अदाणी पॉवर लिमिटेड लगभग 7,017 करोड़ रुपये के उद्यम मूल्यांकन के लिए डीबी पॉवर लिमिटेड (डीबीपीएल) की थर्मल पॉवर संपत्ति खरीदने के लिए सहमत हो गई है। कंपनी ने शुक्रवार को इसकी घोषणा की है। दोनों पक्षों ने शुक्रवार दोपहर सभी नकद सौदे के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए। एमओयू की प्रारंभिक अवधि 31 अक्टूबर, 2022 को अधिग्रहण के पूरा होने तक होगी, जिसे आपसी सहमति से बढ़ाया जा सकता है।

डीबी पॉवर की जांजगीर-चांपा जिले, छत्तीसगढ़ में 600 मेगावाट प्रत्येक थर्मल पॉवर की 2 इकाइयां हैं। अपनी नियामक फाइलिंग में, अदाणी पावर ने कहा, "अधिग्रहण से कंपनी को छत्तीसगढ़ राज्य में थर्मल पॉवर क्षेत्र में अपने संचालन का विस्तार करने में मदद मिलेगी।"

आईएएनएस के इनपुट के साथ

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